
किसान संघर्ष एवं आंदोलनों को राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ जोड़ने का श्रेय मुख्य रूप से महात्मा गांधी को जाता है | उनके नेतृत्व में ही भारतीय जनमानस अखिल भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की ओर अग्रसर हुआ | गांधीजी के नेतृत्व में दो प्रांरभिक सफल किसानो आंदोलनों ने गांधीजी को राष्ट्रीय मंच के केंद्र में ला दिया | भारत में गांधीजी के नेतृत्व में किया गया प्रथम किसान सत्याग्रह चम्पारण सत्याग्रह था | आइये इस सत्याग्रह के घटनाक्रम के बारे में आपको विस्तार से बताते है |
- चम्पारण (बिहार) के किसानो से अंग्रेज बागान ,मालिको ने एक करार कर रखा था जिसके अंतर्गत किसानो को अपने कृषिजन्य क्षेत्र के 3/20 वे भाग पर नील की खेती करनी होती थी | ईस पद्धति को तिनकठिया पद्धति के नाम से जाना जाता है |
- 19वी सदी के अंतिम दिनों में रासायनिक रंगो की खोज और उसके प्रचलन से नील के बाजार में गिरावट आने लगी , जिससे नील बागान मालिक चंपारण क्षेत्र के अपने नील कारखानों को बंद करने लगे |
- करार या समझौता जो किसानो को किया गया था से मुक्त करने के लिए अंग्रेज बागान मालिको ने भारी लगान की मांग की परिणामस्वरूप विद्रोह शुरू हुआ |
- 1917 में चम्पारण के राजकुमार शुक्ल ने चंपारण के राजकुमार शुक्ल ने चम्पारण किसान आन्दोलन का नेतृत्व गांधीजी को सौंपने के लिए लखनऊ में उनसे मुलाक़ात की |
- गांधीजी के चम्पारण पहुचने पर वहा के प्रशासन ने उन्हें जिला छोड़ने का आदेश दिया लेकिन गांधीजी ने “सत्याग्रह” की धमकी दे डाली जिससे डरकर आदेश वापस ले लिया गया |
- “सत्याग्रह” (भारत में) प्रयोग का गांधीजी द्वारा किया गया प्रथम प्रयास था |
- चम्पारण में गांधीजी के साथ राजेन्द्र प्रसाद , ब्रजकिशोर , महादेव देसाई , नरहिर पारीख , जे.पी.कृपलानी भी थे |
- ज्यूडिथ ने अपनी पुस्तक “गांधीजी राइज टू पॉवर” में राजेन्द्र प्रसाद , एस.एन,सिन्हा तथा जे.बी.कृपलानी को सब कांट्रेक्टर कहा |
- चम्पारण आन्दोलन में गांधीजी के नेतृत्व में किसानो की एकजुटता को देखते हुए सरकार ने जुलाई 1917 में मामले की जांच के लिए एक आयोग स्थापित किया जिसके सदस्यों में गांधीजी भी शामिल थे |
- आयोग की सलाह पर सरकार ने “तिनकठिया पद्धति” को समाप्त घोषित करते हुए किसानो को अवैध रूप से वसूले गये धन का 25 प्रतिशत भाग वापिस कर दिया |
- 1917 के बाद किसान घटी हुयी दर पर वसूल की जाने वाली शहरवेशी नामक कर देने से इंकार कर देते थे |
- चम्पारण सत्याग्रह के दौरान गांधीजी के कुशल नेतृत्व से प्रभावित होकर रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें “महात्मा” की उपाधि दी थी |
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