
कोच्चि शहर (Kochi) को आज भी लोग कोचीन के नाम से अधिक जानते है जो केरल की व्यापारिक राजधानी है और विश्व के कुछ गिने-चुने सर्वश्रेष्ठ प्राकृतिक बंदरगाहो में से एक है | यहाँ से कई जहाज विदेशी बन्दरगाहो तक काली मिर्च , समुद्री भोजन , रबड़ , नारियल और जुट आदि पहुचाने के लिए यात्रा करते है | कोच्चि (Kochi) बेहद प्राचीन बंदरगाह है | यहाँ के राजा-महाराजा पुराने समय से ही व्यापारिक वस्तुओ के साथ साथ विदेशी व्यापारियों से संस्कृति एवं विचारो का भी आदान-प्रदान करते रहे है |
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अरब ,चीन ,डच , अंग्रेज और पुर्तगाली आदि सभी को कोचीन (Kochi) ने अपनी ओर आकर्षित किया था इसलिए इस शहर पर इन सभी संस्कृतियों की मिली-जुली छाप देखने को मिलती है | विशेष प्रकार से लगाये गये मछली पकड़ने के चीनी जाल , यहूदियों के उपासनागृह , डचो द्वारा बनाये गये महल , पुर्तगाली वास्तुकला और अंग्रेजी प्रभाव सभी को केरल की कला एवं संस्कृति ने बेहद कुशलता से खुद को समाहित कर एक सूत्र में पिरोया है |
अरब महासागर के किनारे बसी इस नगरी को “अरब सागर की रानी” भी कहा जाता है | वास्तव में अरब सागर के किनारे बसी इस रमणीक नगरी का प्राकृतिक सौन्दर्य इसे राजसी ठाठ प्रदान करता है | समुद्र के किनारे दूर-दूर तक फ़ैली और नयनाभिराम सौन्दर्य से युक्त हरी-भरी फिजा में दूर से आती मल्लाओ की आवाजे अलग ही रंग घोलती है तो नगर में प्रवेश करने पर पुर्तगाली शैली से बनी बुर्जिया और गलियाँ 500 वर्ष पुराने वैभवशाली अतीत की कहानी कहते हुए आपका स्वागत करती है | आइये अब आपको कोच्चि (Kochi) के दर्शनीय स्थलों के बारे में बताते है |
कोच्चि (Kochi) के दर्शनीय स्थल
भट्टनचेरी महल – इसे Dutch Palace भी कहा जाता है | पुर्तगालियो द्वारा 1555 में बनाया गया यह महल कोच्चि (Kochi) के राजा को भेंट किया गया था | इस महल के बीच स्थित Hall में ही कोच्चि के राजा का राज्याभिषेक हुआ था |
गुंडू द्वीप – लगभग 5 एकड़ में फैला यह कोच्चि (Kochi) का सबसे छोटा द्वीप है | यहाँ की एकमात्र इमारत एक Factory है जहां पर सैलानी बुनकरों को हथकरघे पर नारियल के जूट से सुंदर पायदान बनाते देख सकते है |
सेंट फ्रांसिस चर्च – पुर्तगाली वास्तुकला का अद्भुत नमूना यह चर्च भारत में यूरोपियनो द्वारा बनाया गया पहला चर्च है |
कोचीन संग्रहालय – यहाँ पर 19वी शताब्दी के कुछ तेलचित्र , सिक्के , पत्थर और Plaster of Paris से तैयार की गयी कलाकृतिया तथा भित्ति चित्र आदि है |
विलिंगटन संग्रहालय – मानव निर्मित यह द्वीप कोचीन के बंदरगाह की खुदाई के दौरान निकले मलबे से बनाया गया है | इस द्वीप के चारो तरफ बनी झील में Boating की सुविधा द्वारा आप Backwater Cruise का आनन्द ले सकते है |
यहूदी उपासना – इस भवन को 1568 ई. में बनवाया गया था | यहाँ रखे प्राचीन दस्तावेज और चीनियों द्वारा हाथ की चित्रकारी से गये टाईले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है | 200 वर्ष पुरानी इन Tiles पर कभी पर भी एक जैसी चित्रकारी नही की गयी है |
अल्लेप्पी – कोचीन (Kochi) से 64 किमी दूर स्थित यह स्थान केरल की बैकवाटर यात्रा का केंद्र है | इस शहर में झीलों का जाल सा बिछा हुआ है जो शहर को अभूतपूर्व सौन्दर्य प्रदान करती है | कोच्चिं के निकट दूर-दूर तक फैले मुन्नार के चाय बागान भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करते है |
कोच्चि पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – केरल राज्य का मुख्य प्रवेश एवं निकास होने के कारण कोच्चि (Kochi) से देश के सभी प्रमुख नगरो मुम्बई , चेन्नई , बंगलौर , दिल्ली आदि के लिए निरंतर उड़ानों की व्यवस्था है |
- रेल मार्ग- कोच्चि राष्ट्रीय रेल मार्ग द्वारा देश के सभी प्रमुख महानगरो एवं आस-पास के शहरों एवं कस्बो से जुड़ा हुआ है |
- सडक मार्ग – सड़क मार्ग द्वारा तिरुवनंतपुरम से कोच्चि (Kochi) पहुचने में साढ़े चार घंटे एवं कालीकट से पांच घंटे का समय लगता है |
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