
भारत की नदियाँ भारतवासियों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है | भारत की नदियों से पीने का पानी, सस्ता परिवहन , बिजली सहित सम्पूर्ण देश के कई लोगो का रोजगार चलता है | यही कारण है कि देश के सभी बड़े मुख्य शहर नदियों के किनारे बसे हुए है | हिन्दू धर्म में नदियों की पूजा की जाती है और उनके पवित्र पानी को घरो में रखा जाता है | आइये अब आपको भारत की प्रमुख नदियों के बारे में विस्तार से बताते है |
हिमालय का अपवाह
सिन्धु तन्त्र
- सिन्धु एवं उसकी सहायक नदियाँ है झेलम, चिनाब , रावी ,व्यास ,सतलज , जास्कर , गोमल ,द्रास , श्योक , शिगार , कुर्रम , काबुल और गिलगित |
- सिन्धु तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेम्यांगडुंग ग्लेशियर से निकलती है
- सिन्धु कराची के पूर्व अरब सागर में गिरती है |
- सिन्धु में बांयी तरफ से मिलने वाली सहयोगी नदियाँ – श्लोक , काबुल , शिगार और गिलगिट |
- झेलम – यह पीरपंजाल पर्वत में स्थित शेषनाग झील से निकलकर वुलर झील में मिलती है | झेलम और रावी पाकिस्तान में चिनाब नदी में मिल जाती है |
- चिनाब- यह सिन्धु की सहायक नदी है जो हिमाचल में चन्द्रभागा कहलाती है |
- रावी- इसका उद्ग्र्गम कांगड़ा के पास रोहतांग दर्रे के निकट है | इसी के निकट व्यासकुंड में व्यास नदी भी निकलती है | इनकी घाटी को कुल्लू घाटी कहते है |
- व्यास , सतलज की सहायक नदी है |
- सतलज नदी – यह मानसरोवर झील के पास राक्षसताल से निकलती है | स्पीती इसकी सहायक नदी है | भांखडा बाँध सतलज नदी पर स्थित है |
गंगा तन्त्र
गंगा उत्तराखंड के उत्तर काशी जिले से गोमुख के निकट गंगोत्री हिमानी से निकलती है जहां इसे भागीरथी कहते है | पहली बार मैदानी इलाके में प्रवेश हरिद्वार के पास होता है | गंगा के बांये से मिलने वाली सहायक नदियाँ रामगंगा , वरुणा ,गोमती , घाघरा , गंडक , बुढी , कोसी और महानदा | गंगा के दांये से मिलने वाली सहायक नदियाँ – यमुना , टोंस और सोंन | बांग्लादेश में गंगा को पद्मा कहते है जहां जो बंगाल की खादी में मिल जाती है |
- यमुना – इसका उद्गम यमुनोत्री हिमानी (उत्तराखंड) है | यह इलाहाबाद में गंगा में मिलती है | इसकी मुख्य सहायक नदियाँ चम्बल , केन ,सिंध और बेतवा है |
- चम्बल – यह विन्ध्य पर्वत से मऊ के पास निकलती है और इटावा में यमुना में मिलती है | बनास इसकी मुख्य सहायक नदी है | यह नदी अवनालिका अपरदन के लिए प्रसिद्ध है और यह उत्खात भूमि का क्षेत्र कहलाता है |
- सोन – यह अमरकंटक से निकलकर पटना के पास गंगा में मिलती है |
- रामगंगा – यह कुमांयु हिमालय से निकलकर कन्नौज के पास गंगा में मिलती है |
- घाघरा – इसके उपरी हिस्से को करनाली कहते है यह छपरा के पास गंगा में मिलती है |
- गंडक – यह नेपाल चीन सीमा के पास हिमालय से निकलकर सोनपुर के पास गंगा में मिलती है |
- कोसी – पूर्वी नेपाल से जल लाकर यह बिहार के चागडिया के पास गंगा में मिलती है | बार मार्ग बदलने एवं बाढ़ के कारण इसे बिहार काशोक कहते है |
ब्रह्मपुत्र तन्त्र
- इसका उद्गम मानसरोवर झील के निकट चेमायुडुंग हिमनद है |
- यह भारत में नामचा बार्वो चोटी कोए काटकर प्रवेश करती है जहां इसे दिहांग कहते है |
- सादिया नगर में दो सहायक नदियाँ दिबांग एवं लोहित के मिलने के पास इसका नाम ब्रह्मपुत्र पड़ता है |
- ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ सुबनासीरी , धनश्री , पुथीमारी एवं मानस है |
- दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप मन्जुली द्वीप इसी नदी पर है |
- यह बांग्लादेश में पद्मा में मिल जाती है जहां इसे मेघना कहते है |
- ब्रह्मपुत्र गंगा से ग्वालन्दा के पास मिलती है |
प्रायद्वीपीय अपवाह
प्रायद्वीपीय नदियाँ हिमालय की नदियों के अपेक्षा अधिक पुरानी है | ये अपने आधार तल को प्राप्त कर चुकी है | जिससे इसका ढाल अत्यंत मंद है | ये नदियाँ दो भागो में बाँटी गयी है |
बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ
महानदी – यह छत्तीसगढ़ के सिहावा श्रेणी से निकलकर ओडिशा में डेल्टा बनाते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है | इसकी सहायक नदियाँ जोंक , शिवनाथ एवं तेल आदि है |
गोदावरी – प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लम्बी नदी | यह पश्चिमी घाट की नासिक की पहाडियों में त्र्यम्बक से निकलती है | इस दक्षिण गंगा या वृद्ध गंगा भी कहते है | इसकी प्र्मुख सहायक नदियाँ है प्रणहिता , पूर्णा , पेनगंगा , वर्धा , वेनगंगा , इन्द्रावती , मंजीरा आदि |
ब्राह्मणी , वैतरणी एवं स्वर्णरेखा नदियाँ – ब्राह्मणी एवं स्वर्णरेखा छोटा नागपुर पठार पर राँची से निकलती है तथा वैतरणी ओडिशा के क्योंझर पठार से निकलती है | कोयल एवं शंख नदी जब आपस में मीलती है तब वे ब्राह्मणी नदी कहलाती है |
कृष्णा – यह प्रायद्वीपीय भारत की दुसरी बड़ी नदी है जो महाबलेश्वर के निकट निकलती है | इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ कोयना , यरला , वर्ना , पंचगंगा , दूधगंगा , घट[प्रभा , भीमा , तुंगभद्रा एवं मुसी |
कावेरी – यह कर्नाटक के कुर्ग जिले में ब्रह्मगिरी से निकलती है | इसकी घाटी में ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन दोनों मानसून पाए जाते है जिससे इसमें वर्ष भर जल रहता है | इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हेमावर्ती , लोपावनी , अमरावती , लक्ष्मण तीर्थ , सुवर्णवर्ती आदि | यह शिवसमुद्रम नामक जल प्रपात बनाती है | कावेरी को दक्षिण की गंगा की उपमा दी गयी है | कावेरी एवं कृष्णा के बीच पेन्नार नदी का बेसिन है |
अरब सागर में मिलने वाली नदियाँ
- नर्मदा
- ताप्ती
- साबरमती
- माही
- घघर
- लूनी
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