
यद्यपि माँडू (Mandu) की यात्रा अन्य पर्यटन स्थलों की भांति सुविधाजनक एवं सहज नही है लेकिन माँडू की खूबसूरती और बाज बहादुर एवं रूपमती की प्रेमगाथाओ का रोमांच सफर की जटिलता को दूर कर देता है | आमतौर पर माँडू (Mandu) पहुचने वाले अधिकाँश पर्यटकों को इंदौर होकर जाना पड़ता है | इंदौर से थार और थार से माँडू तक की बस यात्रा काफी कठिन है लेकिन माँडू बस स्टैंड पर उतरते ही सफर की कठिनाई पयर्टको के मन से गायब हो जाती है | उस समय ऐसी अनुभूति होती है जो पर्यटकों को उत्साह से भर देती है |
माँडू (Mandu) एतेहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है | यहाँ कदम-कदम पे एतेहासिक दर्शनीय स्थलों की भरमार है | जब सैलानियों को इन एतेहासिक धरोहर से जुडी कहानियों का पता चलता है तो वे प्रेम की महत्ता को समझकर भावविभोर हो उठते है | 45 किमी के दायरे में फ़ैली माँडू की शानदार पहाड़िया , हरे-भरे मैदान तथा ताड़ के बड़े बड़े पेड़ पर्यटकों को रोमांचित एवं मंत्रमुग्ध कर देते है | माँडू की खूबसूरती को देखक पर्यटक भ्रमित हो उठते है कि वे माँडू को कहा से देखना शुरू करे | इसी भ्रम से बचने के लिए स्थानीय गाइड की मदद ली जाती है |
माँडू (Mandu) के दर्शनीय स्थल
बाजबहादुर महल – 1500 ई. में बने इस विशाल महल का निर्माण मुगल बादशाह नाजिरशाह खिलजी ने बाजबहादुर के नाम से करवाया था | इस पुरे महल का निर्माण बहुत कम समय में लाल पत्थरों से हुआ है | महल के भीतरी उत्तरी भाग में संगमरमर का झरोखा बना हुआ है जिसके बारे में प्रचलित है कि यहाँ से बाजबहादुर हरे-भरे उद्यानों को देखता था |
जहाज महल – यह महल प्राचीन काल की उन्नत वास्तुकला का श्रेष्ठ उदाहरण है | 1475 ई. के आस-पास इस महल का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी द्वारा कराया गया | लाल पत्थरों से बना यह महल 120 मीटर लम्बा है जो देखने में पानी के बीच जहाज जैसा लगता है | इस महल का पिछला भाग तालाब में डूबा रहता है | चाँदनी रात में इस महल की सुन्दरता देखते ही बनती है | महल तत्कालीन माँडू (Mandu) के वैभव का अद्भुत उदाहरण है |
रूपमती महल – 1508 ई. में बने इस खुबसुरत महल का निर्माण नासिरशाह खिलजी ने करवाया था | महल की छत से देखने पर पहले हरियाली और फिर धुंध का मनमोहक नजारा दिखाई देता है | रानी रूपमती हर रोज यहाँ से 20 किमी दूर नर्मदा के जल का दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती है | समुद्रतल से 633 मीटर उपर स्थित यह महल बाजबहादुर और रानी रूपमती के प्रेम का साक्षी है |
हिंडोला महल – लाल पत्थरों से बना यह महल अपने अद्भुत वास्तुशिल्प के लिए विख्यात है | महल का उपरी भाग कम और निचला हिस्सा अधिक चौड़ा है | इस महल का निर्माण भी गयासुद्दीन ने करवाया था | पूर्व से पश्चिम की ओर अड़ा और उपर की तरफ समतल हिंडोला महल पर्यटकों को झूले जैसा लगता था |
होशंगशाह का मकबरा – अफगानी वास्तुविदों द्वारा बनवाया गया हिंदुस्तान का यह पहला संगमरमर का मकबरा है जिसकी शिल्पकला देखने लायक है | कहा जाता है कि शाहजहाँ ने अपने चार वास्तुविदो को इस मकबरे की गुम्बद की कारीगरी को देखने और समझने के लिए यहाँ भेजा था | यह मकबरा माँडू (Mandu) के सुल्तान होंशंगशाह ने 1405 ई. में बनवाया था |
रेवा कुंड – इस कुंड का निर्माण बाजबहादुर ने करवाया था | यही से रानी के महल में पानी की सप्लाई होती थी | आज यह एतेहासिक महत्व का स्थान है |
इसके अलावा अशरफी महल , तवेली महल , एको पॉइंट , हाथी पॉइंट , दाई का महल , लोहानी गुफाये , सनसेट पॉइंट और दरयावान आदि भी माँडू (Mandu) के प्रमुख पर्यटन स्थल है |
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