
सतपुड़ा पहाड़ियों के बीच स्थित पचमढ़ी (Pachmarhi) मध्यप्रदेश का कश्मीर कहलाता है | चारो ओर हरियाली , ऊँची-ऊँची चट्टाने , गहरी खाइया , पानी के झरने बरसस ही पचमढ़ी (Pachmarhi) आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेते है | अंग्रेज शासको ने गर्मी से बचने के लिए इस पहाड़ी स्थल को विकसित किया था | पर्यटकों की बढती भीड़ को देखते हुए लगता है कि शांत माहौल की तलाश और कुछ समय यहाँ गुजारने की उनकी इच्छा पचमढ़ी में पुरी होती है | जब से फिल्मो की शूटिंग यहाँ होने लगी है तब से इस कस्बे में चहल-पहल ओर बढी है | साल का आखिरी दिन पचमढ़ी (Pachmarhi) में गुजारने लोग यहाँ खूब आते है | जो सर्दी में भी रोमांच ढूंढते नये साल का सूरज यहाँ उगते देखकर ही वापस जाते है |
पचमढ़ी (Pachmarhi) के पर्यटन स्थल
जटाशंकर – पचमढ़ी बस स्टैंड से 15 किमी दूर जटाशंकर मूलतः एक गुफा है जिसके भीतर सीढियों से गुजरकर जाना पड़ता है | बीचोबीच सीढ़ियाँ इतनी सँकरी है कि झुककर लगभग घसीटते हुए चलना पड़ता है | 4 हिस्सों में बंटी इस गुफा में निरंतर बहती जलधारा इस गुफा की विशेषता है जिसका दूसरा छोर यहाँ से दिखाई नही देता | जलाशय का दृश्य रोमांचित करता है | इस गुफा में प्रवेश होते ही ठंड का सुखद अहसास होता है | 2 पर्वत जोड़ो के बीच लटका शिलाखंड कारीगरी का बेजोड़ नमूना है |
पांडव गुफा – पांडव गुफाये बौध्दकाल में बनी या महाभारत युग में, इसके स्पष्ट एतेहासिक प्रमाण उपलब्ध नही है | पर माना जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के समय यहाँ रुके थे | इन गुफाओं में भी सीढियों पर चलकर जाना पड़ता है | जहां ध्वनि की आवृति कई गुना बढ़ जाती है | गुफा की छत से पुरी पचमढी का अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य देखना सुखद एवं स्फूर्ति भरा होता है |
चौरागढ़ – चौरागढ़ पचमढ़ी (Pachmarhi) का विशेष आकर्षण है जिस पर पहुचने के लिए लगभग 1100 सीढ़िया चढनी होती है | यहाँ से पचमढ़ी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है कि वहां कितने पेड़ , पहाड़ , खाईयाँ एवं रास्ते है |
धुपगढ़ – पचमढ़ी से 10 किमी दूर धुपगढ़ का नजारा देखना एक रोमांचकारी अनुभव होता है | सूर्योदय के समय भी पर्यटक यहाँ जमा होते है | दोनों ही यादगार दृश्यों को पर्यटक कैमरे में जरुर कैद करते है |
बी फाल – यह बी फॉल के दिलकश नजारे ही है जिसकी वजह से पचमढ़ी (Pachmarhi) को विशेष पहचान मिली है | यहाँ 150 फुट उपर से पानी गिरता है जो देखने वाले साँसे रोकने पर मजबूर हो जाते है | नीचे पहुचकर गिरते पानी में नहाना पचमढ़ी आने को सार्थक करता है |
बायसन लॉन – इस वनस्पति उद्यान में कई दुर्लभ वनस्पतियों का संग्रह है | वन्य जीवन में रूचि रखने वाले पर्यटकों को यहाँ कई उपयोगी एवं महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलती है | जंगल घुमने के शौक़ीन पर्यटकों को बन विभाग द्वारा शुल्क चुकाने पर वाहन उपलब्ध कराया जाता है |
सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान – विख्यात पक्षी विज्ञानी डा.सलीम अली द्वारा 1981 में उद्घाटित सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान 525 वर्ग किमी में फैला है | यहाँ बारहसिंगे , चीते , तेंदुए , नीलगाय और हिरण कभी कभार विचरण करते दिख जाते है | सर्दियों के अंतिम दो महीनों में यहाँ प्रवासी पक्षी आते है | बच्चों के खेलने के लिए यहाँ Children Park भी बनाया गया है |
पातालकोट – विशिष्ट आदिवासी जनजीवन शैली के कारण पिछले कुछ सालो में पातालकोट सुर्खियों में रहा है | पचमढ़ी से लगभग 35 किमी दूर बसे पातालकोट को देखने लगभग 2 किमी नीचे उतरना पड़ता है |
तामिया – पहाड़ो और पेड़ो का अद्भुत सौन्दर्य तामिया में देखने को मिलता है जिसका विस्तार 500 किमी तक है | यहाँ के Sunset Point भी शाम को सुहावना लगता है | यहाँ ठहरने की पर्याप्त व्यवस्थाये है | लगभग 100 साल पुराना एक रेस्ट हाउस आज भी ठीक-ठाक हालत में है |
पचमढ़ी (Pachmarhi) में देखने लायक खुबसुरत जगहों की कमी नही है | पुरी तरह घुमने के लिए Guide एवं Jeep कर लेनी चाहिए | उचित किराए पर जीप व्यवस्था होटल वाले करवा देते है | संगमरमर एवं बांस के बने सामान यहाँ के बाजार में मिलते है परन्तु खरीदने से पहले दुकानदारों से मोल-भाव कर लेना चाहिये |
पचमढ़ी पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – पचमढ़ी के लिए भोपाल तक वायु सेवा उपलब्ध है | यह सेवा ग्वालियर , इंदौर , मुम्बई एवं दिल्ली से उपलब्ध है |
- रेलमार्ग – रेल द्वारा पिपरिया तक आया जा सकता है | उसके बाद पचमढ़ी तक के लिए बस सेवाए उपलब्ध है |
- सड़क मार्ग – पचमढ़ी पिपरिया , नागपुर , भोपाल आदि से सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है |
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