
भारत के उत्तरी सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ (Pithoragarh) समुद्रतल से 1650 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | इसे “सौर घाटी” के नाम से भी जाना जाता है | लगभग 10 किमी के दायरे में फ़ैली पिथौरागढ़ घाटी (Pithoragarh) में मनोरम प्राकृतिक छटाओ की भरमार है | कैलाश मानसरोवर झील का रास्ता यही से होकर गुजरता है | चन्द्रवंशीय राजाओं का इस पुरे इलाके के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है |
कत्युरी राजवंश की समाप्ति के साथ ही उनका इलाका छोटे छोटे टुकडो में बंट गया | इनमे एक क्षेत्र पिथौरागढ़ (Pithoragarh) भी था | यहाँ से चन्द्र और राइका शासक काफी शक्ति सम्पन्न थे | सत्ता संघर्ष के बाद उन्होंने उत्तरी क्षेत्र के सभी पहाड़ी जिलो पर अपना दबदबा कायम कर लिया | यहाँ तक कि उनके प्रभाव क्षेत्र में नेपाल ,तिब्बत और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से भी शामिल हो गये | यह क्षेत्र मध्यकाल में बेहद महत्वपूर्ण था | यहाँ आज भी प्राचीन इमारतो के खंडहर बीते हुए कल के वैभव के मौन साक्षी है |
पिथौरागढ़ (Pithoragarh) के दर्शनीय स्थल
चंडाक – पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से लगभग 7 किमी की दूरी पर स्थित चन्दाक प्राकृतिक सुन्दरता से भरपूर स्थान है | लगभग 6000 फुट की ऊँचाई पर होने के कारण पिथौरागढ़ घाटी का भव्य दृश्य नजर आता अहि |
ध्वन – पिथौरागढ़ से 16 किमी दूर यह रमणीक स्थल पर्यटन के लिहाज से बेहद आकर्षक है | 7 हजार फुट की उंचाई पर स्तिथ इस स्थान से बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियाँ बहुत मनोहारी लगती है | विशेष रूप से जब सूर्य की किरणें इन चोटियों पर पडती है |
चौकाडी – पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से लगभग 112 किमी की दूरी रप चौकाडी से हिमालय का भव्य दृश्य दिखाई देता है | यहा पहुचकर सैलानी अनुभव करते है कि मानो हिमालय को हाथ बढाकर छुआ जा सकता है | यह स्थल न केवल हिमालय के मनमोहक नजारों के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यहाँ सूर्यास्त की अद्भुत छटा भी देखते ही बनती है |
नारायण आश्रम – कैलाश मानसरोवर के ओर जाने वाले रास्ते पर पिथौरागढ़ से 130 किमी की दूरी पर नारायण आश्रम को लघु कैलाश भी कहते है | आश्रम में वास्तुकला दर्शनीय है | यहाँ काली नदी का आकर्षण पयर्टको को सम्मोहित सा कर देता है |
पाताल भुवनेश्वर – यह स्थान कल्पना में किसी तिलिस्म से कम नही है | पिथौरागढ़ से इसकी दूरी 147 किमी है | यहाँ 84 सीढ़िया उतरकर पर्यटक विशाल सुरंग एवं गुफाओं के बीच पहुचते है | गुफाओं के अंदर प्राकृतिक रूप से शिलाओं पर बनी अनेक अनूठी कलाकृतिया है | प्रकृति की इस अद्भुत रचना को देखकर पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते है | यहाँ पहुचकर काल्पनिक पाताल लोक की कल्पना साकार हो उठती है | गुफाओं को देखने के लिए विद्युत प्रकाश एवं गाइड की व्यवस्था है |
मुनस्यारी – पिथौरागढ़ (Pithoragarh) से 154 किमी की दूरी पर मुनस्यारी मिलम एवं रालाम ग्लेशियर का मुख्य पडाव है | यहाँ से पंचाचुली पर्वत श्रुंखला के भव्य दर्शन होते है |
मिलम एवं रालाम ग्लेशियर – मुनस्यारी से आगे लिलाम , बुगदयाव एवं रेल्कोट होते हुए मिलम ग्लेशियर तक यात्रा पैदल तय करनी होती है | मुनस्यारी से मिलम की दूरी 54 किमी है | रालाम ग्लेशियर के लिए मुनस्यारी से आगे 51 किमी की पैदल यात्रा तय करनी पडती है | यहाँ के लिए कुमाऊ मंडल विकास निगम ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित करता है |
पिथौरागढ़ पहुचने के मार्ग
- रेलमार्ग – पिथौरागढ़ (Pithoragarh) का निकटतम रेलवे स्टेशन 150 किमी दूर टुनकपुर है जो देश के प्रमुख नगरो से रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है | टनकपुर से बस अथवा टैक्सी द्वारा पिथौरागढ़ पहूचा जा सकता है |
- सड़क मार्ग – पिथौरागढ़ दिल्ली , लखनऊ , देहरादून , नैनीताल सहित देश के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है | इन शहरों से यहाँ के लिए अच्छी बस एवं टैक्सी सेवा है |
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