
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) पहाडियों पर स्थित है | इस शहर को रिहायशी कॉलोनियो को देखकर रोम के किसी शहर में होने का आभास होता है | रमणीय घाटियाँ , नारियल के पेड़ो की कतारे और हरे-भरे मैदानों को अपने आगोश में समेटने को आतुर अरब सागर इस प्रदेश को अद्भुत रूमानी सौन्दर्य प्रदान करता है | कन्याकुमारी और रामेश्वरम जाने वाले पर्यटकों के लिए यह एक पडाव की तरह है |
तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) के पर्यटन स्थल
पद्मनाभ स्वामी मन्दिर – सात मंजिला यह मन्दिर इस शहर की पहचान तो है कि इसके अलावा यह ना केवल केरल का बल्कि पुरे भारत का सबसे अमीर मन्दिर है जहां दर्शनार्थी सबसे ज्यादा भेंट चढाते है | इस मन्दिर के स्तम्भों तथा पत्थर पर की गयी सुंदर नक्काशी और मनमोहक भित्तिचित्र देखने योग्य है | यह केरल और द्राविड वास्तुकला के मेल का अद्भुत नमूना है |
शंकुमुघ्म बीच – यहाँ पर्यटक अधिकतर सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य देखने के लिए आना पसंद करते है | 3 बड़े हॉल एक लम्बे गलियारे से जुड़े है | इस भवन का इतिहास और वास्तुकला से जुडी दुर्लभ वस्तुए , पीपल की मुर्तिया , प्राचीन आभुषण , मन्दिर का रथ और हाथी दांत की अनेक वस्तुए है | इस म्यूजियम में प्लास्टिक की वस्तुए ले जाने पर प्रतिबन्ध है |
श्रीचित्र आर्ट गैलरी – नेपियर म्यूजियम के ही नजदीक स्थित इस आर्ट गैलरी में राजा रवि वर्मा , स्वेटलोवा और निकोलस रिरिक के चित्रों का संग्रह तो है ही साथ ही राजपूत , मुगल और तंजौर भारतीय कला विद्यालयों के कुछ श्रेष्ट चित्र भी यहाँ देखने को मिल जाते है | चीन ,जापान ,तिब्बत एवं बाली के चित्र भी इस संग्रहालय की शोभा बढाते है |
कोवलम बीच – शहर से कुल 13 किमी दूर यह बीच अपने नैसर्गिक सौन्दर्य के कारण विश्व प्रसिद्ध है | यहाँ कतार में खड़े ताड़ के ऊँचे ऊँचे वृक्ष जब हवा से हिलते है तो ऐसा लगता है मानो सागर से आती लहरों के संगीत पर नृत्य कर रहे हो | चमकीली रेत और ऊँची-निची पर्वत चोटियाँ “कोवलम बीच” को पर्यटकों की पसंदीदा जगह बना देती है | भारतीय पर्यटन विकास निगम द्वारा यहाँ एक रिसोर्ट भी बनाया गया है | इस रिसोर्ट में एक होटल , कॉटेज , स्विमिंग पुल , शोपिंग सेंटर आदि है | यहाँ पे एक Yoga Center भी है जहां पर मेडिकल आयल बात और मसाज आदि की भी सुविधाए है |
विंझीजाम – यह कोवलम बीच से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित है | इसे प्राचीन बंदरगाह भी कहा जाता है | जहां पुर्तगालियो और डच लोगो ने व्यापारिक केंद्र स्थापित किये थे | यहाँ पर प्रकाश स्तम्भ के साथ आधुनिक मछली बन्दरगाह भी विकसित किया गया है |
नैयर डैम – यह एक बेहद खुबसुरत पिकनिक स्थल है जहां पर नौकायन और पर्वतारोहण की सुविधाए उपलब्ध है | साथ ही स्विमिंग पुल भी है | 3 घंटे की चढाई के बाद जब पर्यटक पहाड़ की चोटी पर पहुचते है तो वहां का मनमोहक नजारा देखकर अपनी थकान भूल जाते है | वैसे रस्ते में पड़ने वाले दो झरने भी प्रकृति का आकर्षक नजारा पेश करते है |
तिरुवनंतपुरम के महल – तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) में 25 महल है जो वहां के गौरवशाली अतीत की कहानिया सुनाते है | इनमे सबसे पुराना महल वलियाकोट्टरम है जो कि 11वी शताब्दी में बनाया गया था | कोदियार पैलेस वर्तमाना राजप्रमुख श्रीचित्र थिरुवल की सम्पति है | इन्होने दो ओर महल बनवाये थे जिनम से एक राजभवन है तो दूसरा वेल्ल्यामलम पैलेस राज्य सरकार के मुख्य पब्लिक सेंटर काम्प्लेक्स केल्त्रोंन का मुख्यालय है |
वेली टूरिस्ट विलेज – यह पर्यटकों में बेहद लोकप्रिय पिकनिक स्थल है जहा पर झील का पानी और समुद्र का अद्भुत संगम होता है | यहाँ पर पुल , गार्डन , कुछ कलाकृतियाँ देखने के अलावा पर्यटकों को नाव चलाने की सुविधा भी है | यहाँ आने वाला सैलानी खुद को किसी स्वप्नलोक में पहूचा हुआ पाता है | केरल पर्यटक विकास निगम द्वारा यहाँ पानी के खेलो का आयोजन भी किया जाता है |
वन्य प्राणी अभयारण्य – तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) के वन्य प्राणी अभयारण्य भी पर्यटकों को लुभाते है | जहां पर कई दुर्लभ प्रजातियों के जन्तु अपन स्वाभाविक रूप से विचरण करते देखे जा सकते है | इनके अलावा साइंस एंड टेक्नोलॉजी म्यूजियम , चाचा नेहरु बाल संग्रहालय , अक्कुल्म बोट क्लब ,अरुविक्कारा आदि दर्शनीय स्थल है |
तिरुवनंतपुरम पहुचने के मार्ग
- वायु मार्ग – तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा शहर से 8 किमी की दूरी पर स्थित है जो पश्चिम एशिया , श्रीलंका और मालद्वीप से वायु मार्ग द्वारा जुड़ा है
- रेल मार्ग – तिरुवनंतपुरम देश के कई बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है रेल द्वारा कन्याकुमारी की यात्रा 2 घंटे 20 मिनट की है | कोच्ची से रेल एवं बस द्वारा तिरुवनंतपुरम पहुचने में चार घंटे लगते है |
- सड़क मार्ग – राज्य परिवहन का बहुत अच्छा जाल चारो तरफ फैला है जो पुरे राज्य को अच्छी तरह से दुसरे शहरों से जोड़ता है |
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