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माँ वैष्णो देवी कथा | Vaishno Devi Story in Hindi

माँ वैष्णो देवी कथा | Vaishno Devi Story in Hindi
माँ वैष्णो देवी कथा | Vaishno Devi Story in Hindi

पौराणिक कथाओ के अनुसार जब असुरो का आतंक बढ़ गया था तब माता के तीनो रूप माता काली , माता लक्ष्मी और माता सरस्वती तीनो ने एक होकर अलौकिक शक्ति को जन्म दिया | उनकी इस अलौकिक शक्ति से एक सुंदर युवती प्रकट हुयी जिसने तीनो देवियों से उनके निर्माण का कारण पूछा तो देवियों ने बताया कि उनका जन्म पृथ्वी पर सत्य और धर्म को बढ़ाने के लिए किया गया है | इसके बाद उन तीनो देवियों ने उस युवती को रत्नाकर नामक व्यक्ति के घर में जन्म लेने को कहा जो उनका परम भक्त था |
कुछ समय  बाद रत्नाकर की पत्नी ने एक सुंदर बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम उन्होंने वैष्णवी रखा था | वो बच्ची बचपन से ही ज्ञान की धनी थी जिसका कोई मुकाबला नही था | वैष्णवी ने अपने अंतर्ध्यान की बदौलत स्वयं को अपने उदेश्ह्य तक ले जाने के लिए गहन योग की आवश्यकता थी | इसी वजह से वैष्णवी सारे पारिवारिक सुख त्यागकर तपस्या के लिए गहन वन में चली गयी | इसी दौरान भगवान राम अपने चौदह वर्ष के वनवास पर थे और उनकी भेंट वैष्णवी से हुयी | वैष्णवी ने तुंरत भगवान राम को पहचान लिया और उन्हें अपने अंदर समाहित होने के लिए निवेदन किया ताकि वो एक शक्ति का रूप ले सके |
हालांकि भगवान राम ने उस समय मना कर दिया और वनवास खत्म होने पर वापस लौटते समय उनकी इच्छा पुरी करने का वादा किया | भगवान राम अपने वचन के अनुसार वनवास पूरा होने पर वापस लौटे लेकिन इस बार ओव वृद्ध आदमी के वेश में आये थे | दुर्भाग्य से वैष्णवी भगवान राम को पहचान नही पायी | भगवान राम ने वैष्णवी को समझाते हुए कलयुग में जाने के लिए एक होने को कहा ताकि वो अपने कल्कि अवतार में कलयुग में जन्म ले सके | भगवान राम ने वैष्णवी को त्रिकुटा पहाडी पर आश्रम बनाने को कहा ताकि गरीब और दुखी लोगो के दुःख दूर कर सके |  वैष्णवी ने वैसा ही किया और भगवान राम के कथन अनुसार वैष्णवी की ख्याति सब जगह फ़ैल गयी |
समय गुजरता गया और इसी दौरान महायोगी गुरु गोरख नाथ जी ने वैष्णवी की परीक्षा लेने का विचार किया कि वास्तव में वैष्णवी में अलौकिक शक्तिया है | इसलिए उन्होंने अपने शिष्य भैरोनाथ को सच का पता लगाने भेजा | भैरोनाथ चुपके से वैष्णवी के आश्रम में पहुचे तो उनकी सुन्दरता को देखकर मोहित हो गये और उनसे विवाह करने का विचार बनाया | इसी दौरान वैष्णवी की भक्त माता श्रीधर ने के भंडारे का आयोजन किया जिसमे उन्होंने पुरे गाँव को बुलाया जिसमे महायोगी गोरख नाथ जी उनके शिष्य भैरोनाथ सहित सरे शिष्यों को बुलाया | अब भंडारे के दौरान भैरोनाथ ने वैष्णवी को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन विफल रहा |
वैष्णवी भागते हुए पहाडो में चली गयी और वहा तपस्या करने लगी लेकिन भैरोनाथ उनका पीछा करते हुए वहा पर भी आ गया | उसके बाद वैष्णवी दौडती हुयी बाणगंगा , चरणपादुका और अर्धकुंवारी से होते हुए पवित्र गुफा तक पहुची | भैरोनाथ वहा पर भी आ गया लेकिन गुफा के मुख पर वैष्णवी ने उसका सर कलंक कर दिया जो उड़ता हुआ दूर पहाडी पर जा गिरा | भैरोनाथ को जब देवी की शक्ति का एहसास हुआ तब वो वैष्णो देवी से माफी मांगने लगा | दयालु माता ने भैरोनाथ पर दया दिखाते वरदान दिया कि माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद भैरोनाथ के दर्शन करने पर ही यात्रा पुरी मानी जायेगी |इसी दौरान माता वैष्णवी ने ध्यान करते हुए साढ़े पांच फीट उची चट्टान पर पिंडी का रूप ले लिया जो पवित्र गुफा में आज भी मौजूद है

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