
वाइपर मछली (Viperfish) एक शानदार समुद्री मछली है | इसके दांत लम्बे विषदंत जैसे होते है अत: यह देखने में बड़ी भयानक लगती है | इसकी विलक्षण शारीरिक संरचना के आधार पर इसका नाम वाइपर मछली (Viperfish) दिया गया है | आइये इस अनोखी मछली से जुड़े रोचक तथ्य आपको बताते है |
- वाइपर मछली (Viperfish) विश्व के सभी उष्णकटिबंधीय , उपउष्णकटिबंधीय, समशीतोष्ण सागरों एवं महासागरो में पायी जाती है | हिन्द महासागर , अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय भागो में इसकी संख्या सबसे अधिक है |
- वाइपर मछली गहरे सागर की मछली है | यह 450 मीटर से लेकर 2700 मीटर तक के गहरे पानी में देखने को मिलती है |
- वाइपर मछली रात के समय सागर की सतह पर आ जाती है और प्रात:काल होने के पहले ही गहरे पानी में वापस लौट जाती है |
- वाइपर मछली (Viperfish) की तीन प्रमुख जातियाँ है तथा तीनो सागर में अलग अलग गहराइयो पर रहती है |
- वाइपर मछली पर सागर की गहराई का सीधा प्रभाव पड़ता है | इसकी संख्या अलग अलग गहराई पर अलग अलग होती है | वाइपर की सर्वाधिक संख्या 1800 मीटर गहरे पानी में पायी जाती है |
- वाइपर मछली की शारीरिक संरचना सागर की सामान्य मछलियों से पुरी तरह भिन्न होती है | इसका शरीर सांप की तरह लम्बा और पतला होता है तथा सर बहुत छोटा होता है |
- वाइपर मछली (Viperfish) की लम्बाई 15 सेमी से लेकर 25 सेमी तक होती है किन्तु कभी कभी 32 सेमी तक लम्बी वाइपर देखने को मिल जाती है |
- वाइपर के शरीर के रंगो में पर्याप्त विविधता होती है | सामन्यतया सागर की सतह के पास रहने वाली वाइपर मछलियों के शरीर का रंग चांदी की तरह रुपहला होता है तथा गहराई में रहने वाली वाइपर मछलियों का रंग गहरा कत्थई अथवा काला होता है |
- वाइपर मछली (Viperfish) का निचला जबड़ा बड़ा मजबूत होता है तथा इसके दांतों के सिरे काँटेदार होते है | वाइपर का हृदय और गलफड़े इसके दोनों जबड़ो की हड्डियों के मध्य में होते है |
- वाइपर की रीढ़ की हड्डी बड़ी लोचदार होती है जिससे यह साँप की तरह लहरा कर तैर सकती है तथा बहुत छोटे स्थान पर भी सरलता से मुड सकती है |
- वाइपर प्रकाश उत्पन्न करने वाली मछली है | इसके शरीर के विभिन्न भागो में प्रकाश उत्पादक अंग होते है | वाइपर के प्रकाश उत्पादक अंग इसकी आँखों , मूंह , मीनपंखो तथा शरीर के कुछ अन्य भागो पर होते है |
- वाइपर मछली (Viperfish) के शरीर के सभी मीनपंख काफी छोटे होते है | इसकी छाती के मीनपंख तो इसके पेट के मीनपंखो से भी छोटे होते है |
- वाइपर मछली की पुंछ के मीनपंख के ठीक आगे चर्बी का एक मीनपंख होता है तथा चर्बी के मीनपंख के विपरीत दिशा में नीचे की सतह पर छोटे छोटे दो नितम्ब के मीनपंख होते है | वाइपर की पीठ का मीनपंख सबसे महत्वपूर्ण होता है |
- वाइपर मछली का भोजन और भोजन करने का ढंग सागर की सामान्य मछलियों से पुरी तरह भिन्न होता है | इसकी शारीरिक संरचना इस प्रकार होती है कि यह बड़े शिकार को भी सरलता से अपना आहार बना सकती है | वाइपर का पेट इस प्रकार का होता है कि इसे बहुत फैलाया जा सकता है | इसका पेट फैलाते समय ऐसा लगता है मानो रबर का बना हो |
- वाइपर मछली (Viperfish) का प्रमुख भोजन झींगा-झींगी तथा विभिन्न प्रकार की समुद्री मछलिया है | यह सामान्यतया शिकार के लिए कही दूर नही जाती बल्कि एक स्थान पर रुक रुक कर शिकार की प्रतीक्षा करती है |
- वाइपर मछली भोजन के समय अपने शरीर के प्रकाश उत्पादक अंगो से तेज प्रकाश निकालती है | इससे प्रकाश से आकर्षित होकर बहुत से समुद्री जीव इसके निकट आ जाते है | वाइपर इसी अवसर की प्रतीक्षा में रहती है इसका शिकार जैसे ही इसके निकट आता है यह अचानक बिजली की तेजी से उस पर आक्रमण कर देती है और उसे अपने जबड़ो में दबोच लेती है |
- वाइपर मछली (Viperfish) अपने शिकार को खाने से पहले बुरी तरह झकझोरती है | इससे शिकार शिथिल पड़ जाता है इसके बाद यह शिकार को साबुत निगल जाती है |
- वाइपर मछली कभी कभी बड़े बड़े समुद्री जीवो का शिकार भी करती है | इसके लिए यह प्रकाश उत्पादक अंगो का प्रयोग करती है |
- वाइपर मछली (Viperfish) बड़ी तेज होती है | इसे न तो aquarium में रखा जा सकता है और न ही पालतू बनाया जा सकता है | इसलिए अभी तक इसकी बहुत सी आदतों और व्यवहारों की जानकारियाँ प्राप्त नही हो सकी है |
- हमार महानगरो में लगभग 300 मिलियन घन मीटर पानी है यह इतना पानी है कि सागर के सभी जीवन स्वतंत्रतापूर्वक आराम से रह सकते है किन्तु वाइपर मछली के लिए यह स्थान भी कम पड़ता है | वाइपर मछली सागर के तल में क्षेत्र बनाकर रहती है | एक स्थान पर एक ही जाति की वाइपर मछलिया तो छोटे छोटे क्षेत्रो में रह सकती है किन्तु अलग अलग जातियों की वाइपर मछलिया जब एक ही स्थान पर आ जाती है तो उनका क्षेत्र सिमित हो जाता है |
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