
लेह (Leh)मे राजा सिंगे नाम ग्याल का नौ मंजिला महल तिब्बत के पारम्परिक वास्तुशिल्प का शानदार नमूना है | विशाल पत्थरों की सीधी ढलान वाली ऊँची पहाडी पर एक एक करके चढाया गया और निपुण कारीगरों द्वारा उन्हें काट-काटकर नौ-मंजिला भवन बनाया गया जिसे देखने पर पहाडी की चट्टाने भी इसी का हिस्सा प्रतीत होती है | भगवान बुद्ध के जीवन का उल्लेख करती हुयी चित्रकारी से सजी दीवारे इस महल के तंग घुमावदार गलियारे उन कमरों से जुड़े हुए है जिनमे शताब्दी पुराने ढंका चित्रों ,स्वर्ण मूर्तियों और तलवारों के संग्रहालय है |
इस महल में 12 मन्दिर और दो बौद्ध शाही मठ है |महल के पूर्व में उसके प्रवेश द्वार पर लकड़ी की बनी हुयी शेर की एक प्रतिमा है | महल के आरम्भिक दिनों में रस्सी से बंधा हुआ एक शेर पिंजरे में रखा गया था जो पिंजरे में प्रवेश करने और बाहर निकालने के दौरान गर्जना किया करता था | पहाडी पर बनी सीढिया एक विशाल प्रांगण की ओर जाती है जिसे ठेकचेन कहा जाता है जहां शाही नृत्यों का आयोजन किया जाता है | डोगरा आक्रमण के दौरान दरबार हॉल और लोगो के इतिहास ,धर्म और संस्कृति का उल्लेख करते हुए चित्र नष्ट हो गये थे |
लद्दाख का यह अद्वितीय महल जो कि जोरावर की क्रूरतापूर्ण बमबारी से भी बच गया था अब केवल म्यूजियम या प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गया है जिसका स्वामित्व इसमें निवास करने वाली लद्दाख से लोकसभा के लिए चुनी गयी रानी पार्वती देवी के पास है | महल के उपर की ओर उस पहाडी के अन्य चोटी पर लेह मोनेस्ट्री और एक पुराने किले के बुर्ज है |
Pythagoras Biography in Hindi पाईथागोरस (Pythagoras) को महान दार्शनिक और गणितज्ञ माना गया है | इनका जन्म ईसा से भी 500 वर्ष पूर्व यूनान के सामोस नामक टापू में हुआ था | यह मनुष्य जाति का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि प्राचीनकाल में लोग अपने विषय में किसी प्रकार की कोई सुचना लिखित रूप में प्रस्तुत करके नही रखा करते थे अत: उनके विषय में विस्तार से कुछ मिल पाना बड़ा असम्भव सा होता था | यही स्थिति पाईथागोरस की भी है | उस समय लिखने और संचार के साधनों का उतना विकास भी नही हुआ था और न ही शायद छपाई आदि की कोई व्यवस्था उस समय रही थी | पाईथागोरस (Pythagoras) के समय में तो कदाचित भोज-पत्र पर भी लिखने की प्रक्रिया चल पड़ी थी अथवा नही , कहना कठिन है | बाद के लेखको को पूर्ववर्ती पीढियों द्वारा कहा सूनी के आधार पर जो कुछ सूचनाये प्राप्त हो जाया करती थी उनके आधार पर ही उन महान पुरुषो के बारे में कुछ जानकारी मिलने लगी है | पाईथागोरस उस समय उत्पन्न हुए थे जब गणित अपनी आरम्भिक अवस्था में ही था किन्तु अपनी विद्वता के कारण इस महान दार्शनिक ने एक ऐसी प्रमेय का सूत्रपात किया जो विश्वभर में प्राथमिक कक्षाओ में ही व...
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