
मोती मगरी Moti Magri फ़तेह सागर झील के किनारे पर स्तिथ है | इस पहाडी के सबसे उपर महाराणा प्रताप Maharana Pratap की अपने प्रिय घोड़े चेतक Chetak पर बनी एक कास्य मूर्ती है इसे महाराणा भगवंत सिंह मेवाड़ ने बनवाया था जिसे पब्लिक ट्रस्ट की सहायता से समाप्त किया गया | मोती मगरी Moti Magri पर महाराणा प्रताप की युद्ध में सहायता करने वाले भीलू राजा की कास्य मूर्ती भी बनी हुयी है |
महाराणा प्रताप Maharana Pratap की मूर्ती से कुछ ही दूरी पर मोती महल है जिसे महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने बनवाया जो सबसे पहले उदयपुर आये थे | महाराणा उदय सिंह द्वितीय , महाराणा प्रताप की जन्म की खुशी में इस जगह का निर्माण करवाया | आज इस जगह पर हर शाम को लाइट एंड साउंड शो आयोजित किया जाता है जिसमे मेवाड़ के 900 वर्ष के इतिहास को दिखाया जाता है
महाराणा प्रताप Maharana Pratap की मूर्ती के नीचे गुम्बद पर हल्दीघाटी युद्ध का चित्रण किया हुआ है | Moti Magri पर एक धुप घड़ी भी है और एक बड़ी दूरबीन है जिससे दुसरे पहाड़ पर स्तिथ मंदिर को बहुत करीब से देखा जा सकता है | इस दूरबीन को देखने का शुल्क है | इसके अलावा दानी भामाशाह की मूर्ती भी है |Moti Magri पर एक संग्रहालय भी हाल ही के वर्षो में बना है जिसमे कई पुरानी पेंटिंग , चित्तोड़ के दुर्ग का नमूना और हल्दीघाटी के युद्ध का नमूना है |
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